खैरागढ़. इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय, खैरागढ़ के इतिहास में बीता एक वर्ष उपलब्धियों और रचनात्मक सुधारों के नाम रहा। विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. (डॉ.) लवली शर्मा के कार्यकाल का प्रथम वर्ष पूर्ण होने पर परिसर में उत्साह का माहौल है। कार्यभार संभालते ही विश्वविद्यालय को 'ए' ग्रेड दिलाने और इसे आधुनिक व पर्यावरण-सचेत बनाने का जो संकल्प उन्होंने लिया था, उसकी झलक बीते 365 दिनों के कार्यों में स्पष्ट दिखाई दे रही है।
विरासत का संरक्षण और अधोसंरचना विकास

कुलपति की पहल पर विश्वविद्यालय की ऐतिहासिक धरोहरों को नया जीवन मिला है। वर्षों से बंद पड़े कैम्पस-01 स्थित भगवान राधा-कृष्ण के ऐतिहासिक मंदिर और राजमहल के प्रथम तल को न केवल आम जनता के लिए खुलवाया गया, बल्कि वहां अब नियमित कक्षाओं का संचालन भी हो रहा है। इसके साथ ही विभिन्न कक्षाओं की मरम्मत और नवीन निर्माण कार्यों के माध्यम से शिक्षण व्यवस्था को सुदृढ़ किया गया है।
शैक्षणिक सुधार और 'फास्ट-ट्रैक' परीक्षा प्रणाली
अकादमिक स्तर पर पारदर्शिता और गति लाने के लिए क्रांतिकारी कदम उठाए गए हैं। पीएचडी प्रवेश परीक्षा के परिणाम उसी दिन शाम तक घोषित कर अगले ही दिन साक्षात्कार संपन्न कराना एक बड़ी उपलब्धि रही। वहीं, बाहरी विशेषज्ञों के माध्यम से उत्तर पुस्तिकाओं की त्वरित जांच कराकर रिकॉर्ड समय में परीक्षा परिणाम जारी किए गए, जिससे छात्रों का कीमती समय बचा है।
सांस्कृतिक पुनर्जागरण और 'खैरागढ़ महोत्सव'
विगत तीन वर्षों से स्थगित 'खैरागढ़ महोत्सव' की भव्य वापसी इस वर्ष की सबसे बड़ी हाईलाइट रही। इसमें स्थानीय से लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर के कलाकारों ने अपनी कला का प्रदर्शन किया। साथ ही, प्रत्येक माह आयोजित होने वाला 'श्रुति मंडल' और नाट्य महोत्सव विद्यार्थियों को एक जीवंत मंच प्रदान कर रहे हैं। विश्वविद्यालय द्वारा निर्मित असम के लेखक श्री रघुनाथ चौधरी की कांस्य प्रतिमा का निर्माण संस्थान की कलात्मक दक्षता का प्रमाण है।
'ग्रीन कैंपस' और सामाजिक सरोकार
पर्यावरण संरक्षण की दिशा में ठोस कदम उठाते हुए विश्वविद्यालय में वाटर हार्वेस्टिंग और कचरे से खाद बनाने के लिए कंपोस्ट यूनिट स्थापित की गई है। परिसर में उगाई जा रही हरी सब्जियां 'आत्मनिर्भर कैंपस' की ओर एक बढ़ता कदम हैं। विश्वविद्यालय द्वारा गोद लिए गए 04 गांवों में कला-संगीत की कार्यशालाएं और एन.एस.एस. शिविरों के माध्यम से ग्रामीण प्रतिभाओं को मुख्यधारा से जोड़ा जा रहा है।
अंतरराष्ट्रीय पहचान और भविष्य की राह
कुलपति के प्रयासों का ही फल है कि विश्वविद्यालय में विदेशी छात्रों का रुझान पुनः बढ़ा है और वर्तमान में 32 विदेशी विद्यार्थी शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। ललित कला अकादमी की छात्रवृत्ति के लिए 4 छात्रों का चयन और युवा उत्सवों (सेंट्रल जोन व नेशनल) में विश्वविद्यालय का परचम लहराना संस्थान की बढ़ती साख को दर्शाता है।
शासन से मिली बड़ी सौगातें
प्रशासनिक मोर्चे पर भी कुलपति की सक्रियता सफल रही है। विश्वविद्यालय को शासन से 55 सीटर एसी बस, एम्बुलेंस और लंबे समय से प्रतीक्षित शैक्षणिक व गैर-शैक्षणिक पदों पर भर्ती की महत्वपूर्ण स्वीकृति प्राप्त हुई है। साथ ही, स्कूल शिक्षा मंत्री से प्रदेश के स्कूलों में संगीत शिक्षकों की नियुक्ति की मांग कर उन्होंने युवाओं के लिए रोजगार के नए द्वार खोलने की वकालत की है।
कुलपति का संदेश: "हमारा उद्देश्य केवल उपाधि प्रदान करना नहीं, बल्कि खैरागढ़ की इस पावन धरा को वैश्विक पटल पर कला और संस्कृति के सबसे बड़े केंद्र के रूप में स्थापित करना है। यह एक वर्ष केवल नींव है, भव्य इमारत का निर्माण अभी जारी है।"




