खैरागढ़/छुईखदान. किसान अधिकार संघर्ष समिति (दनिया-अतरिया-उदयपुर-हनईबन-सम्पूर्ण परिक्षेत्र), विकास खण्ड - छुईखदान, जिला-खैरागढ़-छुईखदान-गण्डई ने हाल ही में समाचार पत्रों और सोशल मीडिया में प्रसारित हो रही भ्रामक खबरों का खंडन किया है। इन खबरों में कहा जा रहा था कि किसान आंदोलन में सक्रिय महिला सदस्य द्वारा यौन उत्पीड़न संबंधित कोई प्राथमिकी (FIR) दर्ज कराई गई है।

समिति ने स्पष्ट किया कि उनके आंदोलन से जुड़े किसी भी पदाधिकारी या सदस्य द्वारा यौन उत्पीड़न से संबंधित कोई भी FIR दर्ज नहीं कराई गई है। इसके विपरीत, समिति ने बताया कि आंदोलन से जुड़े उनके कुछ पदाधिकारियों को विगत दो माह से विभिन्न तरीकों से धमकियां दी जा रही हैं ताकि वे आंदोलन से अलग हो जाएं।
धमकी और AI-एडिटेड फोटो का मामला
समिति ने एक घटना का जिक्र करते हुए बताया कि हाल ही में उनके एक पदाधिकारी को अज्ञात मोबाइल नंबर से व्हाट्सएप पर दो धमकी भरे मैसेज और AI से एडिटेड फोटो भेजकर आंदोलन से अलग होने के लिए धमकाया गया था। इस मामले में पुलिस विभाग में लिखित शिकायत एवं FIR दर्ज की गई है।
“हमारे आंदोलन में सक्रिय कोई भी पदाधिकारी या सदस्य द्वारा यौन उत्पीड़न संबंधित कोई भी FIR दर्ज नहीं कराया गया है। अपितु आंदोलन से जुड़े हमारे कुछ पदाधिकारियों को विभिन्न तरीकों से आंदोलन से पृथक होने के लिये कई प्रकार से धमकियां विगत दो माह से दी जा रही हैं।”
दर्ज की गई FIR धमकी संबंधित एवं सूचना प्रौद्योगिकी (IT) के मामले पर आधारित है। समिति ने इस बात पर भी चिंता व्यक्त की कि माननीय उच्चतम न्यायालय के दिशा-निर्देशों के मुताबिक इस प्रकार की शिकायतों में गोपनीयता बरती जानी थी, किंतु दुर्भाग्य है कि इन दिशा-निर्देशों का पालन नहीं हो पाया।
समिति की मांग और नेतृत्व

किसान अधिकार संघर्ष समिति ने पुलिस विभाग से मांग की है कि ऐसे झूठे और भ्रामक समाचार प्रकाशित करने और करवाने वालों पर तत्काल सख्त कार्यवाही की जाए। साथ ही, आंदोलन से जुड़े किसी भी पदाधिकारी एवं सदस्य के खिलाफ षड्यंत्र करने वालों पर लगाम लगाई जाए।
समिति के प्रमुख सदस्य हैं:
संरक्षक: श्री गिरवर जंघेल (पूर्व विधायक खैरागढ़), श्री मोतीलाल जंघेल (वरिष्ठ अधिवक्ता)
संयोजक: श्री सुधीर गोलछा (सभापति, जनपद पंचायत, छुईखदान)
अध्यक्ष: श्रीमती लुकेश्वरी जंघेल
सचिव: श्रीमती प्रियंका जंघेल
मुख्य बात: किसान अधिकार संघर्ष समिति ने यौन उत्पीड़न की खबरों को पूरी तरह से खारिज किया है और स्पष्ट किया है कि एक पदाधिकारी को धमकी मिलने पर FIR दर्ज की गई है, न कि यौन उत्पीड़न के मामले में।
इस बीच, समाचार पत्रों व न्यूज पोर्टलों में प्रसारित खबरों को लेकर पूर्व विधायक कोमल जंघेल ने भी अपना पक्ष स्पष्ट किया है। उन्होंने कहा है कि मीडिया में उनके खिलाफ यौन उत्पीड़न एवं रेप जैसे गंभीर मामलों के दर्ज होने संबंधी जो खबरें प्रसारित की जा रही हैं, वे पूरी तरह झूठी और भ्रामक हैं। उनका कहना है कि यह उनकी राजनीतिक और सामाजिक छवि को नुकसान पहुंचाने की सुनियोजित साजिश है।




