रायपुर. छत्तीसगढ़ के सरकारी स्कूलों में आगामी शैक्षणिक सत्र 16 जून से एक नई व्यवस्था लागू करने की तैयारी है। राज्य स्तर पर तैयार की जा रही इस पहल के तहत अब स्कूलों में नियमित रूप से मंत्रोच्चार, प्रार्थना और सांस्कृतिक गतिविधियों को अनिवार्य किया जाएगा। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों में अनुशासन, नैतिक मूल्यों और भारतीय संस्कृति के प्रति जागरूकता बढ़ाना बताया जा रहा है।
नई व्यवस्था के अनुसार, प्रत्येक स्कूल में सुबह की प्रार्थना सभा के दौरान दीप प्रज्वलन के साथ सरस्वती वंदना और गुरु मंत्र का पाठ किया जाएगा। इसके साथ ही विद्यार्थियों को भारतीय परंपराओं से जोड़ने के लिए नियमित रूप से सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक गतिविधियों को भी शामिल किया जाएगा।
दोपहर के समय मध्यान्ह भोजन से पहले भोजन मंत्र का उच्चारण अनिवार्य किया जाएगा, वहीं स्कूल की छुट्टी से पहले शांति पाठ कराया जाएगा। इसके लिए स्कूल परिसरों में लाउडस्पीकर की व्यवस्था की जाएगी और प्रमुख मंत्रों को दीवारों पर भी लिखा जाएगा, ताकि विद्यार्थी उन्हें आसानी से पढ़ और याद कर सकें।
शिक्षा विभाग द्वारा हर शनिवार को ‘गतिविधि दिवस’ के रूप में मनाने का भी निर्णय लिया गया है। इस दिन विद्यार्थियों को बिना बस्ते के भी स्कूल बुलाया जा सकेगा और खेल, कला, संगीत, नाटक, योग तथा अन्य रचनात्मक गतिविधियों के माध्यम से उनका समग्र विकास किया जाएगा।
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह पहल विद्यार्थियों में अनुशासन और एकाग्रता बढ़ाने में सहायक हो सकती है, वहीं कुछ वर्गों द्वारा इसे लेकर विविध प्रतिक्रियाएं भी सामने आ सकती हैं। फिलहाल, विभाग इस नई व्यवस्था को लागू करने की दिशा में तैयारियों में जुटा हुआ है।
विपक्ष ने किया करारा हमला
इस फैसले को लेकर सियासी बयानबाजी भी तेज हो गई है। दीपक बैज ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि सरकार मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने में विफल रही है और अब इस तरह के फैसलों से ध्यान भटकाने की कोशिश कर रही है।
उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश के कई स्कूलों में अब तक बच्चों को किताबें उपलब्ध नहीं हो पाई हैं और आरटीई के तहत प्रवेश प्रक्रिया भी सुचारू रूप से नहीं चल रही है। उन्होंने आगे कहा कि कई स्कूलों में शिक्षकों की कमी है तथा बालिकाओं के लिए शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाएं भी नहीं हैं।
दीपक बैज ने सवाल उठाया कि जब आधारभूत व्यवस्थाएं ही अधूरी हैं, तब मंत्रोच्चार लागू करना प्राथमिकता कैसे हो सकता है। उन्होंने यह भी पूछा कि क्या सरकार सरकारी स्कूलों को ‘शिशु मंदिर’ की तर्ज पर चलाना चाहती है।




