खैरागढ़. जिले के स्वास्थ्य ढांचे को सुदृढ़ करने के लिए पूर्ववर्ती सरकार द्वारा शुरू की गई 'हमर क्लिनिक' योजना खैरागढ़-छुईखदान-गंडई (KCG) में सरकारी उपेक्षा का शिकार हो गई है। जिला मुख्यालय के वार्ड नंबर 12, अमलीपारा में लाखों की लागत से बना क्लिनिक भवन सोमवार रात संदिग्ध परिस्थितियों में आग की लपटों में घिर गया। विडंबना यह है कि जिस भवन को आम जनता के उपचार के लिए खोला जाना था, वह संचालन शुरू होने से पहले ही जांच और विवादों के घेरे में आ गया है।
संचालन नहीं, डंपिंग यार्ड बना क्लिनिक

अमलीपारा स्थित इस हमर क्लिनिक का उद्घाटन कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में ही हो चुका था। उद्देश्य था स्थानीय निवासियों को घर के पास निःशुल्क ओपीडी, प्राथमिक उपचार, 12 प्रकार की दवाइयां और बीपी-शुगर जैसी 6 बुनियादी जांच सुविधाएं प्रदान करना। लेकिन उद्घाटन के महीनों बाद भी यहाँ स्वास्थ्य सेवाएं शुरू नहीं हो सकीं। स्वास्थ्य विभाग ने इस कीमती संसाधन का उपयोग जनसेवा के बजाय चिरायु योजना (RBSK) के दस्तावेजों को स्टोर करने के लिए किया, जो प्रशासन की दूरदर्शिता पर बड़े सवाल खड़े करता है।
शॉर्ट सर्किट नहीं, साजिश की आशंका?

आगजनी की इस घटना ने कई अनसुलझे सवाल छोड़ दिए हैं। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉ. आशीष शर्मा के अनुसार, भवन में अभी तक विद्युत कनेक्शन (बिजली सप्लाई) शुरू ही नहीं हुई थी। ऐसे में शॉर्ट सर्किट की थ्योरी पूरी तरह खारिज हो जाती है। स्थानीय स्तर पर यह आशंका प्रबल है कि किसी असामाजिक तत्व ने जानबूझकर इस वारदात को अंजाम दिया है। मंगलवार सुबह जब फायर ब्रिगेड की टीम पहुंची, तब तक चिरायु योजना से जुड़े कई महत्वपूर्ण फॉर्म और रजिस्टर जलकर राख हो चुके थे।
वीआईपी वार्ड, फिर भी बदहाल स्थिति

अमलीपारा वार्ड की राजनीतिक संवेदनशीलता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि यहाँ स्थानीय विधायक (कांग्रेस) और नगर पालिका अध्यक्ष (भाजपा) दोनों का निवास है। सत्ता और विपक्ष के इन दो दिग्गज चेहरों के गढ़ में एक महत्वपूर्ण स्वास्थ्य केंद्र का संचालन न हो पाना और वहां सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम न होना, जनप्रतिनिधियों की उदासीनता की पराकाष्ठा है।

अधिकारियों का पक्ष और पुलिसिया जांच मामले की गंभीरता को देखते हुए खैरागढ़ पुलिस मौके पर पहुंच चुकी है और आसपास के निवासियों से पूछताछ कर रही है।
"भवन नवनिर्मित है और अभी औपचारिक रूप से किसी को हैंडओवर नहीं किया गया था। अंदर राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के कुछ फॉर्म रखे थे, कोई भी मेडिकल रिपोर्ट या मरीजों का डेटा नहीं जला है। आग लगने के वास्तविक कारणों की जांच की जा रही है।"
— डॉ. आशीष शर्मा, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO)
जनता में आक्रोश
वार्डवासियों का कहना है कि स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही के कारण लाखों रुपए की लागत से बनी संपत्ति बर्बाद हो रही है। यदि क्लिनिक समय पर शुरू हो जाता, तो न केवल लोगों को उपचार मिलता बल्कि भवन की देखरेख और सुरक्षा के लिए वहां स्टाफ की मौजूदगी भी रहती। फिलहाल, पुलिस जांच के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा कि यह केवल लापरवाही थी या किसी बड़े घोटाले के साक्ष्यों को मिटाने की साजिश।

