खैरागढ़. छत्तीसगढ़ सरकार की किसान हितैषी नीतियों का प्रभाव अब जमीनी स्तर पर दिखाई देने लगा है। राज्य की कृषक उन्नति योजना के तहत मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने प्रदेशभर के 24 लाख 28 हजार किसानों के खातों में 10 हजार करोड़ रुपये की कृषि आदान सहायता राशि एकमुश्त हस्तांतरित की। इसी क्रम में खैरागढ़-छुईखदान-गंडई (केसीजी) जिले के 66,281 किसानों को कुल ₹273 करोड़ 8 लाख 42 हजार की अंतर राशि सीधे बैंक खातों में प्राप्त हुई।

राज्य स्तरीय कार्यक्रम बिलासपुर जिले के बिल्हा विकासखंड स्थित ग्राम रहंगी में आयोजित किया गया, जहां से मुख्यमंत्री ने रिमोट के माध्यम से राशि जारी की और विभिन्न जिलों के लाभार्थी किसानों से वर्चुअल संवाद भी किया।
धान उत्पादक किसानों को बड़ा आर्थिक संबल
खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 में धान विक्रय करने वाले केसीजी जिले के किसानों ने कुल 3,75,755 क्विंटल धान का उपार्जन किया था। राज्य सरकार द्वारा जारी अंतर राशि ने किसानों की आय में प्रत्यक्ष वृद्धि करते हुए उन्हें आगामी कृषि सत्र के लिए आर्थिक मजबूती प्रदान की है।
जिले में कलेक्टर इंद्रजीत सिंह चंद्रवाल के मार्गदर्शन में विकासखंड स्तर पर कार्यक्रम का सीधा प्रसारण खैरागढ़ स्थित लाल दिलीप सिंह मंगल भवन एवं जनपद पंचायत छुईखदान में किया गया।
जनप्रतिनिधियों ने बताया ‘आर्थिक आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़ा कदम’
कार्यक्रम में जिला पंचायत अध्यक्ष प्रियंका खम्मन ताम्रकार, उपाध्यक्ष विक्रांत सिंह, जिला पंचायत सदस्य अरुणा बनाफर, ललित चोपड़ा, पूर्व सभापति घम्मन साहू तथा सांसद प्रतिनिधि खम्मन ताम्रकार सहित अनेक जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे।
अतिथियों ने कहा कि राज्य सरकार की यह पहल किसानों की आय बढ़ाने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में किसानों के सशक्तिकरण हेतु चल रही योजनाओं की भी सराहना की।
किसानों को वैकल्पिक आय स्रोत अपनाने की सलाह
कार्यक्रम के दौरान किसानों को केवल धान पर निर्भर न रहकर दलहन, तिलहन, उतेरा फसल, पशुपालन, मुर्गीपालन और बकरीपालन जैसे वैकल्पिक आय स्रोतों को अपनाने के लिए प्रेरित किया गया। अधिकारियों ने बताया कि इससे किसानों की आय स्थिर और बहुआयामी बनेगी।
कृषि आधारित आत्मनिर्भरता की ओर कदम
इस अवसर पर जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी प्रेम कुमार पटेल, उपसंचालक कृषि राजकुमार सोलंकी सहित कृषि विभाग के अधिकारी-कर्मचारी और बड़ी संख्या में किसान उपस्थित रहे।
कृषक उन्नति योजना के तहत मिली यह आर्थिक सहायता न केवल किसानों की लागत क्षमता को मजबूत करेगी, बल्कि उन्हें आधुनिक खेती और विविध आय मॉडल अपनाने के लिए भी प्रोत्साहित करेगी — जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को दीर्घकालिक मजबूती मिलने की उम्मीद है।




