खैरागढ़. गांव के एक सामान्य किसान परिवार से निकलकर डॉक्टर बनने का सपना देखना और उसे पूरा करने के लिए लगातार असफलताओं के बावजूद डटे रहना आसान नहीं होता। ग्राम देवरी के दुर्गेश साहू ने इसी संघर्ष को सफलता में बदलकर मिसाल कायम की है। NEET UG 2026 में 522 अंक और 63 हजार 218 ऑल इंडिया रैंक हासिल करने वाले दुर्गेश का छत्तीसगढ़ मेडिकल काउंसलिंग के प्रथम राउंड में चंदूलाल चंद्राकर मेमोरियल गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज, कचांदूर, दुर्ग में MBBS के लिए चयन हुआ है।

दुर्गेश के पिता नरसिंह साहू किसान हैं। परिवार में अब तक किसी ने 12वीं कक्षा से आगे की पढ़ाई नहीं की थी। नरसिंह साहू बताते हैं कि उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि उनका बेटा NEET जैसी परीक्षा पास कर डॉक्टर बनेगा। इसके बावजूद उन्होंने हमेशा दुर्गेश को प्रोत्साहित किया और कभी हार न मानने की सीख दी।
दुर्गेश ने प्रारंभिक शिक्षा केजऊ राम चौरे स्मृति विद्या मंदिर, देवरी से प्राप्त की। मेडिकल की तैयारी के दौरान लगातार दो प्रयासों में चयन नहीं होने से वह निराश हो गया और आगे प्रयास छोड़ने का मन बना लिया था। ऐसे समय में शिक्षक एवं संस्थापक सुरेश चौरे ने उसका हौसला बढ़ाया। उन्होंने दुर्गेश को दोबारा मेहनत करने के लिए प्रेरित किया और लगातार उसका साथ दिया। परिवार ने भी उसकी हर जरूरत का ध्यान रखते हुए उसका मनोबल बनाए रखा।

दुर्गेश के डॉक्टर बनने के सपने की शुरुआत उसके स्वयं के स्वास्थ्य संघर्ष से हुई। उसे फेफड़ों से संबंधित निमोनिया हुआ था। इलाज के लिए उसे दुर्ग और राजनांदगांव जैसे शहरों में जाना पड़ता था। इसी दौरान उसके मन में डॉक्टर बनने का संकल्प पैदा हुआ। उसने तय किया कि वह आगे चलकर पल्मोनोलॉजिस्ट बनेगा और फेफड़ों से जुड़ी बीमारियों से जूझ रहे मरीजों का इलाज करेगा।
दुर्गेश अपनी सफलता का श्रेय शिक्षक सुरेश चौरे और परिवार को देता है। उसका कहना है कि दो बार MBBS में चयन नहीं होने के बाद वह हार मान चुका था, लेकिन सुरेश सर ने उसे फिर से खड़ा किया। परिवार ने भी हर परिस्थिति में उसका साथ दिया।
अब दुर्गेश का सपना सिर्फ डॉक्टर बनने तक सीमित नहीं है। वह अपने गांव देवरी में एक अस्पताल बनाना चाहता है, जहां गरीब मरीजों का कम फीस में इलाज हो सके। दो असफल प्रयासों के बाद मिली यह सफलता दुर्गेश के लिए मंजिल नहीं, बल्कि उस बड़े सपने की शुरुआत है।


