खैरागढ़. मरणोपरांत नेत्रदान किसी दृष्टिबाधित व्यक्ति के जीवन में रोशनी की नई उम्मीद जगा सकता है। इसी मानवीय संदेश को जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से जिले में चल रहे नेत्रदान पखवाड़े के तहत जिला गायत्री परिवार एवं जिला अंधत्व नियंत्रण समिति, खैरागढ़-छुईखदान-गंडई के संयुक्त तत्वावधान में नेत्रदान जागरूकता संगोष्ठी आयोजित की गई। संगोष्ठी में मां गायत्री परिवार से जुड़े करीब 100 परिजनों ने मरणोपरांत नेत्रदान का संकल्प लिया।

छत्तीसगढ़ शासन के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के निर्देशन में आयोजित पखवाड़े के तहत कलेक्टर इंद्रजीत सिंह चंद्रवाल एवं मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. आशीष शर्मा के मार्गदर्शन में जिलेभर में जागरूकता गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। नेत्रदान पखवाड़ा के नोडल अधिकारी एवं सहायक नोडल अधिकारी श्रीमती दुर्गेश नंदिनी श्रीवास्तव के नेतृत्व में खंड चिकित्सा अधिकारियों और नेत्र सहायक अधिकारियों के सहयोग से लोगों को नेत्रदान के लिए प्रेरित किया जा रहा है।

संगोष्ठी में नेत्रदान के महत्व, प्रक्रिया, आवश्यक सावधानियों और मरणोपरांत समय पर सूचना देने की आवश्यकता की जानकारी दी गई। साथ ही नेत्रदान को लेकर समाज में व्याप्त भ्रांतियों और आशंकाओं को दूर किया गया। वक्ताओं ने कहा कि नेत्रदान केवल व्यक्तिगत संकल्प नहीं, बल्कि परिवार और समाज को प्रेरित करने वाला पुनीत कार्य है।

गायत्री परिवार के सदस्यों ने स्वयं संकल्प लेने के साथ परिवार, मित्रों और समाज के अन्य वर्गों को भी नेत्रदान के लिए प्रेरित करने का संकल्प लिया। स्वास्थ्य विभाग ने जिलेवासियों से अपील की कि वे स्वयं नेत्रदान का संकल्प लें और अपने परिजनों को इसकी जानकारी दें। कार्यक्रम में ‘नेत्रदान-महादान’ के संदेश को जन-जन तक पहुंचाने का आह्वान किया गया।


