खैरागढ़. जिले में आवारा मवेशियों की बढ़ती समस्या के बीच ग्राम जुरलाकला के ग्रामीणों ने इससे निपटने का अनोखा और अनुकरणीय तरीका अपनाया है। जहां एक ओर कई गांवों में किसान अपने मवेशियों को दूसरे गांवों में छोड़ने को मजबूर हैं, वहीं जुरलाकला के ग्रामीणों ने आवारा मवेशियों को कहीं और छोड़ने के बजाय अपने गांव में ही रखने और उनकी सेवा करने का निर्णय लिया है। ग्रामीणों की यह पहल अब क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई है।

गांव में आवारा मवेशियों की बढ़ती संख्या से किसानों को अपनी खड़ी फसल बचाने में काफी परेशानी हो रही थी। दूसरे गांवों से भी मवेशियों को लाकर बेसहारा छोड़ दिए जाने के कारण समस्या और बढ़ रही थी। ये मवेशी खेतों में पहुंचकर फसलों को नुकसान पहुंचा रहे थे। ऐसे में ग्राम सभा की बैठक में ग्रामीणों ने सर्वसम्मति से निर्णय लिया कि गांव में घूम रहे आवारा मवेशियों को दूसरे स्थान पर छोड़ने के बजाय गांव के गौठान में घेरा बनाकर रखा जाएगा।

मवेशियों के चारा-पानी की जिम्मेदारी भी ग्रामीणों ने सामूहिक रूप से उठाने का फैसला किया है। इसके लिए ग्रामीण बारी-बारी से चारा और पानी की व्यवस्था करेंगे। साथ ही मवेशियों की नियमित देखरेख और समय पर चारा-पानी देने के लिए ₹100 रोजी के हिसाब से एक व्यक्ति को जिम्मेदारी सौंपी गई है। वह व्यक्ति नियमित रूप से गौठान में रखे मवेशियों को चारा-पानी उपलब्ध कराएगा।
सरपंच, पंच, ग्राम पटेल और ग्रामीणों ने प्रशासन से भी इस पहल में सहयोग की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि प्रशासन मवेशियों के चारा-पानी और देखरेख की व्यवस्था में सहयोग करे तो इस समस्या का स्थायी समाधान निकालने में मदद मिल सकती है।
एक गांव से दूसरे गांव पहुंच रही समस्या
गौरतलब है कि आवारा मवेशी इन दिनों जिले की गंभीर समस्याओं में शामिल हो चुके हैं। खेतों में खड़ी फसलों को नुकसान पहुंचाने के साथ-साथ मुख्य मार्गों पर बैठे और घूमते मवेशी सड़क हादसों का कारण भी बन रहे हैं। प्रशासनिक स्तर पर कलेक्टर द्वारा लगातार मवेशियों के उचित प्रबंधन को लेकर निर्देश दिए जाने के बावजूद संबंधित स्तर पर प्रभावी व्यवस्था नहीं होने से समस्या बनी हुई है।
मवेशियों से परेशान किसान और ग्रामीण कई बार उन्हें पकड़कर दूसरे गांवों में छोड़ देते हैं। इसके चलते समस्या का समाधान होने के बजाय एक गांव से दूसरे गांव तक आवारा मवेशियों का सिलसिला लगातार बढ़ता जा रहा है। जुरलाकला के ग्रामीणों की पहल ने इस समस्या के बीच एक सकारात्मक उदाहरण पेश किया है। अब ग्रामीणों ने प्रशासन से भी अपेक्षा जताई है कि वह मामले को गंभीरता से लेते हुए जिलेभर में आवारा मवेशियों के उचित प्रबंधन के लिए ठोस और स्थायी व्यवस्था सुनिश्चित करे।


