खैरागढ़. नवगठित खैरागढ़-छुईखदान-गंडई जिले के उद्यानिकी विभाग में आरक्षित बजट के कथित दुरुपयोग और वित्तीय प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताओं का मामला सामने आया है। शिकायतकर्ता द्वारा प्रस्तुत विभागीय आदेश, ट्रेजरी दस्तावेज और भुगतान संबंधी रिकॉर्ड में अनुसूचित जाति उपयोजना के मद से सामान्य वर्ग के किसानों को लाभ दिए जाने के आरोप लगाए गए हैं। मामला सामने आने के बाद विभाग ने आरक्षित मद दर्ज होने को ‘कॉपी-पेस्ट और टाइपिंग की गलती’ बताया है। हालांकि, शिकायतकर्ता का सवाल है कि अलग-अलग तारीखों के कई आदेशों में एक ही मद का उल्लेख बार-बार कैसे हुआ और उसी आधार पर ट्रेजरी प्रक्रिया भी कैसे पूरी हुई?
‘मांग संख्या-13’ से भुगतान का आरोप
छुईखदान ब्लॉक से जारी स्वीकृति आदेशों में ‘मांग संख्या-13 अनुसूचित जाति उपयोजना’ अंकित होने की बात सामने आई है। शिकायतकर्ता के मुताबिक इसी मद से ट्रेजरी में वाउचर प्रस्तुत कर राशि आहरित की गई और लाभ पाने वाले हितग्राही सामान्य वर्ग से संबंधित हैं। शिकायत के जवाब में सहायक संचालक उद्यान ने इसे सामान्य मद की जगह कॉपी-पेस्ट से हुई त्रुटि बताया। शिकायतकर्ता का कहना है कि यदि यह केवल टाइपिंग की गलती थी तो भुगतान प्रक्रिया के दौरान इसे ठीक क्यों नहीं किया गया?
चार किसानों के नाम, भुगतान एक ही खाते में
आदेश क्रमांक 865 में सामुदायिक फेंसिंग योजना के तहत ओमप्रकाश, लोकेश कुमार, भूपेन्द्र और विनोद के नाम पर कुल 1,95,570 रुपए स्वीकृत होने का उल्लेख है। शिकायतकर्ता के अनुसार बैंक एवं ट्रेजरी भुगतान रिकॉर्ड में पूरी राशि ‘LOKESH KUMAR JANGHEL’ के एक ही खाते में स्थानांतरित दिखाई देती है। बाकी तीन हितग्राहियों के नाम भुगतान सूची में नहीं होने का आरोप है। शिकायतकर्ता का कहना है कि विभाग के निराकरण पत्र में इस कथित विसंगति का स्पष्ट जवाब नहीं दिया गया।
90 दिन में एक ही परिवार को तीन योजनाओं का लाभ
ग्राम पद्मावतीपुर के एक परिवार को लगातार योजनाओं का लाभ मिलने का आरोप भी शिकायत में लगाया गया है। शिकायतकर्ता के अनुसार करीब 90 दिनों के भीतर ओमप्रकाश जांगेल और उनके तीन पुत्रों लोकेश, भूपेन्द्र एवं विनोद को अलग-अलग योजनाओं में लाभ मिला। सामुदायिक फेंसिंग के लिए 1,95,570 रुपए, पपीता क्षेत्र विस्तार के लिए 79,875 रुपए तथा केला क्षेत्र विस्तार के लिए 37,500 रुपए जारी किए जाने का उल्लेख है। विभाग ने पात्रता के संबंध में अलग-अलग खसरा होने का आधार बताया है। हालांकि शिकायतकर्ता ने सीमित बजट के बीच एक ही परिवार को लगातार लाभ मिलने की निष्पक्षता पर सवाल उठाया है।
दो आदेशों का संयुक्त आहरण, जवाब में एक का ही उल्लेख
वित्तीय रिकॉर्ड को लेकर एक और सवाल आदेश क्रमांक 887 और 889 से जुड़ा है। शिकायतकर्ता के अनुसार दोनों आदेशों की स्वीकृत राशि क्रमशः 68,270 रुपए और 1,17,143 रुपए थी, जिन्हें जोड़कर 1,85,413 रुपए का संयुक्त ट्रेजरी वाउचर तैयार किया गया। आरोप है कि विभागीय स्पष्टीकरण में केवल एक आदेश का उल्लेख किया गया, जबकि संयुक्त आहरण से संबंधित दूसरे आदेश की जानकारी स्पष्ट नहीं की गई।
सीएम हेल्पलाइन में शिकायत का निराकरण, सवाल बरकरार
मामले की शिकायत सीएम हेल्पलाइन में भी किए जाने की बात सामने आई है। विभाग ने जवाब में किसी वित्तीय अनियमितता से इनकार करते हुए आरक्षित मद के उल्लेख को टाइपिंग की गलती बताया। शिकायतकर्ता का आरोप है कि बैंक खाते में एकमुश्त भुगतान समेत उठाए गए अन्य सवालों का स्पष्ट निराकरण किए बिना शिकायत को निराकृत कर दिया गया।
‘वार्षिक टारगेट’ पूरा करने की प्रक्रिया बताया

शिकायतकर्ता मंदीप चौरे के अनुसार तत्कालीन ग्रामीण उद्यान विस्तार अधिकारी संजय कुमार जांगड़े से जब इस मामले में चर्चा की गई तो उन्होंने कथित अनियमितताओं को विभाग के वार्षिक लक्ष्य की पूर्ति की सामान्य प्रक्रिया बताया। शिकायतकर्ता ने इस पूरे मामले की लिखित शिकायत छत्तीसगढ़ राज्य अनुसूचित जाति आयोग के अध्यक्ष एवं सचिव से करते हुए दस्तावेजों की जांच, भुगतान प्रक्रिया के सत्यापन और जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध उचित कार्रवाई की मांग की है।
अब रिकॉर्ड की स्वतंत्र जांच से ही साफ होगा मामला
पूरे प्रकरण में मुख्य सवाल आरक्षित मद के उल्लेख, ट्रेजरी आहरण, वास्तविक बैंक भुगतान और हितग्राहियों की पात्रता के दस्तावेजों के आपसी मिलान का है। यदि विभाग का दावा है कि आरक्षित मद का उल्लेख महज टाइपिंग या कॉपी-पेस्ट की त्रुटि थी, तो जांच में यह स्पष्ट होना जरूरी होगा कि स्वीकृति से लेकर ट्रेजरी और बैंक भुगतान तक प्रत्येक स्तर पर किस मद का उपयोग किया गया। वहीं, चार हितग्राहियों के नाम पर स्वीकृत राशि एक खाते में पहुंचने के आरोप की भी बैंक रिकॉर्ड से स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है।


