खैरागढ़. जिले में सड़कों की बदहाली ग्रामीणों के लिए परेशानी का सबब बनी हुई है। लगातार मांग और विरोध के बावजूद जर्जर सड़कों की मरम्मत या पुनर्निर्माण को लेकर ठोस पहल नहीं होने से लोगों में नाराजगी है। जिला मुख्यालय से महज 8 किलोमीटर दूर ग्राम दपका की सड़क भी वर्षों से जर्जर है। सड़क पर जगह-जगह बड़े-बड़े गड्ढे हो चुके हैं। बारिश के दौरान गड्ढों में पानी भर जाने से राहगीरों को उनकी गहराई का अंदाजा नहीं लगता और दुर्घटना का खतरा बढ़ जाता है। ग्रामीणों के अनुसार कई लोग इन गड्ढों में गिरकर घायल हो चुके हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि सड़क की मरम्मत के लिए कई बार शासन-प्रशासन से मांग की गई, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। उनका आरोप है कि चुनाव के दौरान नेता सड़क सुधारने का वादा करते हैं, लेकिन चुनाव खत्म होने के बाद गांव की ओर दोबारा ध्यान नहीं दिया जाता।
दपका सहित तीन से चार गांवों के ग्रामीण रोज इसी मार्ग से आवाजाही करते हैं। सबसे ज्यादा परेशानी साइकिल से खैरागढ़ स्कूल आने-जाने वाले छात्र-छात्राओं को होती है। खराब सड़क के कारण कई बार बच्चे गड्ढों में गिरकर घायल हो जाते हैं। कपड़े खराब होने पर उन्हें स्कूल जाने के बजाय वापस घर लौटना पड़ता है।
क्षेत्र में कई क्रेशर होने के कारण इस मार्ग पर भारी वाहनों की आवाजाही भी होती है। ग्रामीणों का कहना है कि भारी वाहनों के लगातार आवागमन से सड़क तेजी से जर्जर हुई है। सामान्य तौर पर ग्रामीण सड़कें छोटे वाहनों के आवागमन के लिए बनाई जाती हैं, लेकिन भारी वाहनों के दबाव ने स्थिति और बिगाड़ दी है।
विधायक यशोदा नीलांबर वर्मा ने कहा कि उन्होंने दपका मार्ग की मरम्मत के निर्देश दिए थे, लेकिन अब तक काम शुरू नहीं हुआ। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि प्रशासन ने जल्द सड़क की मरम्मत नहीं कराई तो वह ग्राम दपका के लोगों के साथ धरने पर बैठेंगी।
अब सवाल यह है कि जब जिला मुख्यालय से महज 8 किलोमीटर दूर सड़क की हालत इतनी खराब है, तो दूरस्थ क्षेत्रों की स्थिति क्या होगी। ग्रामीणों और स्कूली बच्चों को सुरक्षित सफर कब मिलेगा, यह अब शासन-प्रशासन की कार्रवाई पर निर्भर है।


