खैरागढ़. छत्तीसगढ़ में चल रही स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया को लेकर मतदाता सूची की पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो गए हैं। आम आदमी पार्टी ने आरोप लगाया है कि फॉर्म-7 के माध्यम से फर्जी आवेदन देकर बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम कटवाने का सुनियोजित षड़यंत्र किया जा रहा है, जो लोकतंत्र की जड़ों पर सीधा प्रहार है।

जिला खैरागढ़-छुईखदान-गंडई के जिला अध्यक्ष मनोज कुमार गुप्ता ने जिला निर्वाचन अधिकारी को सौंपे ज्ञापन में कहा कि फॉर्म-7 के तहत न तो आवेदकों की पहचान का सत्यापन किया जा रहा है और न ही हस्ताक्षरों का भौतिक मिलान। यह प्रक्रिया लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 31 का उल्लंघन है, जिसमें गलत जानकारी देने पर दंडात्मक प्रावधान हैं। पार्टी का दावा है कि प्रदेश में कई स्थानों पर एक ही व्यक्ति द्वारा एक दिन में 25-30 आवेदन दिए गए, जिनमें नाम-पते तक गलत पाए गए।
आम आदमी पार्टी ने आरोप लगाया कि इस प्रक्रिया के जरिए विशेष रूप से एसटी, एससी और अल्पसंख्यक वर्ग के मतदाताओं को राजनीतिक रूप से हाशिए पर धकेलने की कोशिश हो रही है। इसके साथ ही प्रथम प्रकाशन और आपत्ति अवधि समाप्त होने के बाद ‘लॉजिकल विसंगतियों’ के नाम पर लगभग 30 प्रतिशत मतदाताओं को नोटिस जारी किए गए। बाहर नौकरी या काम के सिलसिले में गए लाखों लोग समय पर जवाब नहीं दे पाए, परिणामस्वरूप उनके नाम सूची से हट गए, जबकि राजनीतिक दलों को इसकी औपचारिक सूचना भी नहीं दी गई।
पार्टी ने मांग की कि चुनाव आयोग तत्काल सख्त कार्रवाई करे, फर्जी आवेदनों की जांच हो और हटाए गए नामों की पारदर्शी पुनर्समीक्षा की जाए। आम आदमी पार्टी ने चेतावनी दी है कि यदि निष्पक्षता सुनिश्चित नहीं हुई तो वह लोकतंत्र की रक्षा के लिए सड़क, सदन और न्यायालय—तीनों मोर्चों पर संघर्ष करेगी।




