खैरागढ़. आंगनबाड़ी कार्यकर्ता सहायिका संयुक्त मंच छत्तीसगढ़ के आह्वान पर जिले की हजारों आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाएं अपनी तीन सूत्रीय मांगों को लेकर आंदोलनरत हैं। शहर के इतवारी बाजार स्थित रावण भांटा में दो दिवसीय धरना देकर उन्होंने सरकार के समक्ष अपने अधिकारों की मांग बुलंद की। आंदोलन के दूसरे दिन प्रदर्शन ने उग्र रूप लिया, जब कार्यकर्ताओं ने रैली निकालकर कलेक्टर कार्यालय की ओर कूच किया।

नारेबाजी करते हुए आगे बढ़ रहीं कार्यकर्ताओं को पुलिस ने कार्यालय पहुंचने से पहले ही रोक दिया। मौके पर ज्ञापन लेने पहुंचे तहसीलदार को कार्यकर्ताओं ने यह कहते हुए लौटा दिया कि वे कलेक्टर या अपर कलेक्टर को ही ज्ञापन सौंपेंगी। इसके बाद कार्यकर्ता मुख्य मार्ग पर बैठ गईं और घंटों इंतजार करती रहीं, लेकिन कोई वरिष्ठ अधिकारी उनसे मिलने नहीं पहुंचा। अंततः शाम लगभग 5:30 बजे सभी बिना ज्ञापन सौंपे वापस लौट गईं।

प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांग है कि उन्हें शासकीय कर्मचारी का दर्जा दिया जाए। उनका कहना है कि जिस तरह शिक्षा कर्मियों और पंचायत कर्मियों का नियमितीकरण किया गया, उसी तरह आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को भी सरकारी कर्मचारी घोषित किया जाए। जब तक शासकीयकरण नहीं होता, तब तक सम्मानजनक वेतन और मध्यप्रदेश की तर्ज पर सुविधाएं लागू की जाएं।
इसके अतिरिक्त हर वर्ष ₹1000 मानदेय वृद्धि, मासिक पेंशन, बीमा सुविधा, सेवानिवृत्ति पर ग्रेच्युटी, मृत्यु पर एकमुश्त सहायता राशि तथा कार्यकर्ताओं को ₹26,000 और सहायिकाओं को ₹22,000 मासिक वेतन देने की मांग भी प्रमुख रूप से उठाई गई।
संघ की जिलाध्यक्ष लता तिवारी ने कहा कि वर्षों से आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाएं कम मानदेय में अधिक जिम्मेदारियां निभा रही हैं। वर्तमान में कार्यकर्ताओं को लगभग ₹10,000 और सहायिकाओं को ₹5,000 मानदेय मिलता है, जो बढ़ती महंगाई के दौर में बेहद अपर्याप्त है। उन्होंने बताया कि उन्हें पोषण, सर्वे, स्वास्थ्य और अन्य विभागों से जुड़े अतिरिक्त कार्य भी करने पड़ते हैं।
प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा। जिले में जारी इस विरोध प्रदर्शन से प्रशासनिक हलकों में भी हलचल देखी जा रही है।




