खैरागढ़. वन अग्नि यानी दावानल केवल जंगल की हरियाली को ही नहीं जलाता, बल्कि वह मिट्टी की उर्वरता, जैव विविधता, जल स्रोतों और वन पर आश्रित लाखों लोगों की आजीविका पर भी गहरा आघात करता है। इसी गंभीर चुनौती को देखते हुए खैरागढ़ वनमंडल में इस वर्ष वन अग्नि की रोकथाम एवं प्रभावी प्रबंधन के लिए एक व्यापक और बहुआयामी जनजागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान की विशेषता यह है कि इसमें नुक्कड़ नाटक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों को जनसंवाद का प्रमुख माध्यम बनाया गया है, ताकि संदेश सीधे ग्रामीणों तक प्रभावी ढंग से पहुंचे।
वनमंडल अधिकारी खैरागढ़ के नेतृत्व में संचालित इस अभियान के तहत आमजन को यह जानकारी दी जा रही है कि आग लगने से केवल सूखी पत्तियां ही नहीं जलतीं, बल्कि बीज, नवांकुर, झाड़ियां, घास, औषधीय पौधे और मिट्टी के भीतर मौजूद फंगस-बैक्टीरिया जैसे सूक्ष्म जीव भी नष्ट हो जाते हैं। इसके कारण जंगल का प्राकृतिक पुनरुत्पादन बाधित होता है। आग से मिट्टी की ऊपरी परत सख्त हो जाती है, जिससे वर्षा जल का अवशोषण कम हो जाता है और भू-जल स्तर में गिरावट आती है। साथ ही वन्यजीवों का भटकना, मानव-वन्यप्राणी द्वंद्व की आशंका, अवैध शिकार की संभावनाएं और पर्यावरण प्रदूषण जैसी गंभीर समस्याएं भी उत्पन्न होती हैं।
वन विभाग द्वारा फायर लाइन की कटाई-सफाई, फायर वॉचर्स की तैनाती और आग की सूचना मिलते ही त्वरित नियंत्रण जैसी पारंपरिक व्यवस्थाएं हर वर्ष की जाती रही हैं। हालांकि इस वर्ष प्रबंधन को और अधिक सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से खैरागढ़ वनमंडल कार्यालय में फॉरेस्ट फायर कंट्रोल रूम की स्थापना की गई है। विभाग ने आम नागरिकों से अपील की है कि किसी भी प्रकार की अग्नि घटना की सूचना तत्काल कंट्रोल रूम के मोबाइल नंबर 9301321797 पर दें, ताकि समय रहते आग पर काबू पाया जा सके।
इसके अलावा नवाचारी प्रयासों के तहत महुआ वृक्षों की ब्लेजिंग कर नियंत्रित जलन, गांवों में मुनादी, दीवार लेखन, पोस्टर चस्पा करना तथा स्कूली छात्र-छात्राओं के लिए वाद-विवाद, निबंध, चित्रकला और रंगोली प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जा रहा है। सरपंचों एवं संयुक्त वन प्रबंधन समितियों के अध्यक्षों को पोस्टकार्ड के माध्यम से भी अग्नि सुरक्षा को लेकर जागरूक रहने और ग्रामीणों को प्रेरित करने की अपील की गई है।

जनसंपर्क और प्रभावी संवाद को सशक्त बनाने के उद्देश्य से 3 फरवरी 2026 से खैरागढ़, छुईखदान, गंडई और साल्हेवारा परिक्षेत्र के अंतर्गत कुल 36 गांवों में नुक्कड़ नाटक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इन्हीं कार्यक्रमों की कड़ी में छुईखदान रेंज के गातापार नाका परिसर में वन अग्नि सुरक्षा से संबंधित जनजागरूकता नुक्कड़ नाटक और सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें 200 से 250 ग्रामीणों की सहभागिता रही। नाटकों के माध्यम से आग से होने वाले नुकसान और उसकी रोकथाम के उपाय सरल और सहज भाषा में समझाए गए।
कार्यक्रमों के दौरान उपस्थित वन अधिकारी और कर्मचारी भी ग्रामीणों से सीधे संवाद कर वन अग्नि के दुष्प्रभावों की जानकारी दे रहे हैं तथा प्रभावी नियंत्रण के लिए वन विभाग के साथ सहयोग की अपील कर रहे हैं। इसके साथ ही संयुक्त वन प्रबंधन समितियों की बैठकों में भी अग्नि सुरक्षा को प्रमुख एजेंडा बनाकर चर्चा की जा रही है।
वन विभाग का स्पष्ट मानना है कि जब तक समाज स्वयं जागरूक और सहभागी नहीं बनेगा, तब तक वन अग्नि जैसी गंभीर समस्या पर स्थायी नियंत्रण संभव नहीं है। इसी सोच के साथ खैरागढ़ वनमंडल द्वारा शुरू की गई यह पहल जंगल, पर्यावरण और आने वाली पीढ़ियों को सुरक्षित रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण और दूरगामी कदम के रूप में देखी जा रही है।




